सनातन धर्म के रूप अनेक

 सनातन धर्म

सनातन धर्म है बड़ा अनोखा,इसके जैसा ना कोई देखा ।

रंग रूप इसका बड़ा प्यारा जो औरों से बिल्कुल न्यारा ।

सनातन धर्म में पर्व बहुत हैं ,एक से बढ अदभुत सभी हैं 

एक जाता तो दूजा आता सभी के मन को खूब है भाता ।



गई नवरात्रि दीवाली आई ,घर-घर में सबके खुशियां छाई

अब देखो छठ पूजा आई,पावनता मन मस्तिष्क समाई ।

चार दिनों का ये त्योहार ,रखते सब हैं शुद्ध विचार

मन पवित्र रख कार्य हैं करते ,छठी मैया से खूब हैं डरते ।


लौकी भात से ये पर्व शुरु हैं करते ,द्विजे दिन फिर खरना करते ।

तीजे शाम को अर्ध्य चढ़ा कर ,चौथे पर्व का समापन करते ।

प्रसाद में इनको ठेकुआ चढ़ता ,चावल का लड़ुआ भी बनता

जोड़ा सूप फल फूल से सजता ,छठी मैया के घाट दमकता ।


कुछ त्रुटि ना हो रखते ध्यान ,करे छठी मैया सबका कल्याण

आस सभी की पूरण करते ,जो भी हृदय से सेवा देते ।

संजू भी छठ का व्रत है रखती ,मां के चरण अरदास है करती 

छठी मैया सुनलो विनय हमार ,हम सबका नैया करना पार ॥

डॉ० संजुला सिंह "संजू"

जमशेदपुर (झारखंड )

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